Saturday, August 20, 2011

I know I can win it


I know I can win it

I came to this world not knowing my cards,
but I knew I had a power which goes beyond words,
I witnessed the silence of mountain
I witnessed the rivers flowing with ferocious velocity,
And I could capture all of them with my sheer curiosity,

I was a tryer , few things went right, many went wrong,
Amid the looming clouds of desperation I was strong,
When nature tested me against mighty tornados and flood,
I showed my never say die spirit and fought till my last blood,

I never could understand the meaning of limitation,
Guess it was something out of some coward's imagination,
Even if God tried to snatch from me any kind of activity,
A Curie among me managed to invent radio activity,
When God tried to deprive me of my senses,
A Hawking among me explain working of something beyond Earth fences,

I rose from ashes, I never allowed someone to say what I couldn't do,
When they said I would not be able to walk, I showed them and even flew,
I always kept aside all the curses and counted just the boon,
Trouble often found my Armstrong, one fought the cancer, other went to Moon,
Whenever challenges asked me any question I raised my head and nod,
I worked with childlike spirit and fought against each n every odd,

From start I learned the language of love and friendship,
I knew the value of faith and respected every relationship,
I loved selflessly as mother to my son,
I prioritize someone else's life as a father,
I loved my friends passionately and platonically,
The home of love with the bricks of trust shaped fantastically

Now I am bit falling apart and bit tired,
I am seeing this destruction and my brothers being fired,
But I know for sure and I always will keep this candle of faith lit,
I am a survivor and my heart says I know I can win it,
My doors are where the optimism always knocks,
This earth is my love and this is where human being Rocks !!

- Amit Nandwal

Friday, July 22, 2011

Zindagi milegi na dobaara

Zindagi na Milegi Dobara -

Wo purani subah jo zinda hai ab talak is Dil me,
Jab khwahishon ki patange pahuch thi neel gagan me,

Kuch bade hue to duniyan ne bataya ki namumkin kya hai,
Ab lagta hai na sunte wo Baat to dekh paate haqiiqat kya hai,

Kyun na sune aaj bas ye dil jo apna chahta hai,
Kyun na chune wo dagar, jiske naam se jamana daraata hai,

Jo paa gaye tum apni manjil to jaan loge jeena kya hai,
Himmat ke un raasto pe yun bhi safar tanha hai,

Fir yahi duniyan karegi tumhe salaam,
Par tumhe kya parwah hogi, saamne haste hue honge naye aayaam,

Ye zindagi ki barsaat hai, bheegne ke darr se naa ruko
, Bas saath lo doston ko aur nikal pado,

Dekho door se bula raha hai tumhe sansar saara,
Aaj mat socho kyonki Zindagi NA milegi Dobaara............ By Amit Nandwal inspired from ZNMD

Saturday, June 4, 2011



इन्दोरी भिया और प्यार का पंचनामा

इन्दोरी भिया सन्डे सूबे सूबे नहा धो के पोहे की दूकान पर अपने मित्र परकाश भिया से मिलते है ,
फिर दोनों में क्या बातचीत होती है , मतलब इन्दोरी भिया क्या बोलते हैं चलिए हम भी सुनते हैं !
क्योंकि भिया हम तो इन्दोरी हैं पेले अपनी बात बोलेंगे , फिर ही तो नंबर आएगा अगले का ..

' अरे परकाश भिया , कल तो क्या सोलिड फिल्म देखि यार , आओ सुनाता हूँ उसकी कहानी ,
भिया सालों बाद ऐसी धांसू फिल्म देखि की इंटरवल में जाके ना खाया ५० का समोसा , ना पिया फिरि का पानी ,

अरे भिया अपन तो नाम सुनके इच बावले हो गए थे ,
ए बोले नाम क्या मूवी का , प्यार का पंचनामा ,
मेने किया भिया इतंने दिन से ये अपन चौक पे कर रिये थे ,
फाईनाली फिल्म वालो ने भी कर दिया ये ड्रामा ,

भिया कहानी ३ साफ़टवेयर वाले लडको की है ,
अरे वोही अपने tcs/इनफ़ोसिस वाले बिल्ला लगाके घूमते है ना वोही ,
एं . क्या इसके अलावा भी कोई कंपनी होती है क्या ,
यार आईडिया नि है यार , अपने रमेश का छोरा और कलावती की छोरि तो इनमे ही है ,
अपन को लगा बाकी सारे काल सेन्टर ही होते होंगे , चलो कोई नि आगे सुनो

लडको के नाम इन्दोरी इश्टआयल में दिए हैं , रज्जो , liquid और चौधरी ,
इनमे से ये चौधरी को तो मैंने कने कायकी एड में तो देख रखा है , पूरा doubt है मेरे को,
भिया ने मस्त बाडी वाडी बना के राखी है , अपने कल्लू पेलवान भी शरमा जाए ,
सबसे सीधा ये इच लगा भिया अपने को , वैसे भी बाडी वालो का दिमाग याने राजवाड़े में सनाटा ,
४० साल हो गए आज तक देखने को नि मिला पूरी लाइफ में ,

वैसे ये लड़के कम लग रिये थे , frustation की फ़ौज ज्यादा लग रिये थे ,
साले इतना कमा रिये थे फिर भी शान्ति नि थी इनको ,
नि तो बोलो भिया 40,००० की सेलेरी और रो ऐसे रिये थे ,
अपने इंदौर में तो इतनी सेलेरी में ४ बार रैडिसन हो आऊं महीने में

यहाँ मूवी में सुरुआत में ही वो liquid का liquid रोक दिया था ,
बापडे ने अगले सीन में वो भजन सुनाये हैं की पूछो मत ,
अपन ने अगल बगल देखा कोई लेडिस तो नि बैठी गलती से ,
देखा तो दिमाग का दही हो गया , लड़कियां लडको से ज्यादा हस रही है ,
ये इंदौर में जबसे टी.आइ खुला है तब से पूरी generation ही बिगड़ गयी है ,

पर बंदा डेड शाना था , पूरी मूवी में गालियों का licence ले रखा था भाई ने ,
और पूरी मूवी में पब्लिक ने उसके dialogue पर सिटी मारी है ,
मैंने बोला इंदौर की जनता भी बावली हो गयी है ,
पाट्निपुरे पे कोई 'साला' भी बोल देता है तो हाथ में क्या क्या उठा लेते हैं ,
ने यहाँ पे हाथ उठा के तालियाँ पीट रहे हैं ,

पर भिया अपना फेवरेट charachter तो निकला रज्जो ,
अरे हाँ भिया निकली नि निकला है , मूवी ऐसे ही थोड़ी धांसू है ,
ब्रेक के बाद जो भाषण लपेटा है उसने लडकियों पे ,
भिया अपने तो आँख कान नाक सब खुल गए ,
मतलब भिया तारीख पे तारीख , तारीख पे तारीख ,
अरे मतलब हिट पे हिट . हिट पे हिट . हिट पे हिट ,
कह दिया तभी अपन ने इंडिया में नहीं सकती ये पिक्चर पिट

भिया तुम्हारी जलेबी अब बहुत ठंडी हो गयी है , जल्दी से निपटाओ ,
और मजा लेना हो तो पेली फुर्सत मिलते ही रिगल में ये पिक्चर देख के आओ

- आपके इन्दोरी भिया ( अमित नन्दवाल )

Monday, September 27, 2010

इन्दोरी भिया जब पहुचे अमरीका .................

ये सूबे सूबे सूरज को पता नि क्या हुआ ने कहाँ से निकला ,
मुह हाथ धोके जैसे ही अख़बार देखा तो नईदुनिया में मेरे नाम का चर्चा निकला ,
भिया मैंने तो मजे मजे में कोम्पेटशन में करीना को पेचान लिया था ,
पर ऊपर वाले की मेहरबानी देखो उसने भी शायद मेरा टेलेंट जान लिया था ,
तभी तो आज आधी रोटी में डाल के दाळ खा रिया हूँ ,
और परसों की फिलाइट पकड़ के ने अमरीका जा रिया हूँ

ने यूँ तो अपन ने पाट्निपुरे से पलासिया के भोत चक्कर मारे थे ,
पर ये सीधे पीलेन में बैठने का पहला मौका पड़ा था ,
भिया एअरपोर्ट की चमक देख के तो में चमक ही गया ,
और जब एक सुन्दर लेडीस ने पानी का पुछा फिर तो पूरा बहक ही गया ,
एक घंटे तो बड़ा मजा आया पीलेन में बैठे बैठे टीवी देखता रिया ,
थोड़ी देर बाद यार पता नि कहाँ से प्रेशर बन्ने लगा ,
अब फ्री में मिल रिया था तो मैंने नि नि करके बस ३ बार खाया था ,
पहले तो सोचा रुक जाऊँ पर फिर सोचा सफ़र लम्बा था ,
एक जगो थोड़ी लाइन दिख री थी परेशान लोगो की ,
अपने इन्दोरी दिमाग ने पेचान लिया हो ना हो येई होगा ,
पर अन्दर जाकर सब समझ आ गया , बाहर से जो चमकता है वो अन्दर खोखला होता है ,
इतने बड़े पीलेन के बाथरूम में एक मग्गा भी नहीं होता है

खैर जैसे तैसे फिर अमरीका पहुच ही गए ,
और बचपन में जो हवा बनायीं थी एक दिन अमरीका जाऊंगा , उसके दीदार भी हो ही गए ,
वहां जाके देखा तो भिया कार का मेले लगे थे और लोगो के आते पते नि थे ,
हर तरफ साफ़ सफाई थी और धुल धक्कड़ के वांदे थे ,
इतनी बड़ी इमारते की देख के सिर घूम रिया था ,
और बड़ा तो क्या वहां का तो बच्चा भी इंग्लिस में बोल रिया था ,
अपने प्रकाश भिया पहले से ही थे अमरीका में , वो आये अपने को रिसिव करने ,
मेरा माथा तब ठनका जब वो लेफ्ट के बदले चले राईट चलने ,
बोला क्या भिया कितने साल हो गए ड्राइव करते करते ,
मेरे चिल्लाने पर उन्होंने समझाया मुझे अमरीका का राईट चलते चलते ,
मैंने बोला भिया यहाँ का सिस्टम ही उल्टा है ,
तभी इंडिया ने निचे से और अमरीका ने ऊपर से टॉप किया है
और पता चला यहाँ पेट्रोल को कहते हैं गैस
बनियान के साथ झंडे की निक्कर को भी कहते हैं ड्रेस ,
जहाँ लडको से ज्यादा लड़किया मारती है सुट्टा ,
रिश्ते नातों का यहाँ अच्छे से लगा हुआ है बट्टा ,
देखने की बात है यहाँ ना कभी बिजली जाती है ना पानी ,
पर कभी कंप्यूटर फ़ैल हो जाए तो पुरे अमरीका को याद आ जाएगी नानी ,
हर जगह मिलेगा मक डोनाल्ड और मिलेगा सबवे
जो बात आप भूल नहीं पाओगे वो होंगे अमेरीकन हाईवे ,
और बहुत कुछ देखने के बाद भिया अपन तो यही कहेंगे ,
दुनियां की सबसे ताकतवर कंट्री का अच्छा लगा बनके अपने को गेस्ट ,
पर चाहे हो इस्ट या हो वेस्ट , अपना इंडिया ने अपना इंदौर सबसे बेस्ट

- इन्दोरी जनता के लिए इन्दोरी भिया अमित नन्दवाल

Saturday, April 3, 2010

"Shit I am missing my college once again












"Shit I am missing my college once again"


Shit I am missing my college days once again ,

Wo Mechanical ki darawani lab ,
Wo bade bade bolilers se nikalta drain ,

Shit I am missing my college days once again ,

Wo ED ki class mein saare din khade rahne ki Saja ,
Wo Din raat dimag mein ghumte Straight Lines , curves aur Plain ,

Shit I am missing my college days once again ,

Wo Kirchoff's law ke Tez jhatke ,
wo Electrical ke numericals mein kabhi voltage toh kabhi poer gain ,

Shit I am missing my college days once again ,

Wo Submission ke time ki Daud ,
Wo viva ka number aate hi hona nervous aur Bechain ,

Shit I am missing my college days once again ,

Wo GT ki planning karna garden mein ,
Wo toppers ko kahna thode din side mein rakho Brain ,

Shit I am missing my college days once again ,

Wo saare assignments canteen mein karna ,
wo assignment complete karne wale ko kahna apna Best Friend ,

Shit I am missing my college days once again ,

Wo computer ki lab mein Solitaire khelna ,
Wo faculty pki aahat par dimag ko ALT TAB ke liye karna train ,

Shit I am missing my college days once again ,

Wo project banane ke pahle puri duniyan se alag hone ka dava karna ,
wo deadline aane par Jugaad mein laga dena Din rain ,

Shit I am missing my college days once again ,

Wo placement ke pahle Sir RS Agrawal aur Madam Shakuntala Devi se milna
wo 60 % par bhi company walo ko convince karna , hum sa nahi koi brain ,

Shit I am missing my college days once again ,

Wo placement hone ke baad ki khsuhi ,
wo saal bhar saara din ghumte rahna , mano ban gaye ho electric Fan

Shit I am missing my college days once again ,

Wo farewell party ke Dance ,
wo bichadne ke dukh mein bhiga dena apne Nain ,

Shit I am missing my college days once again ,

Wo aakhiri din pure college mein ghumna ,
wo yadon ko sametne ke liye use karna camere ke lens ,

Shit I am missing my college days once again ,

Dedicated to all College students and specially to my Beloved Engineering
college GSITS ................ Amit Nandwal

Saturday, February 13, 2010

Indori Bhiya ka Valentine Day



इन्दोरी भिया का वेलेंटाइन डे



चम्पू :- मैं तो रीगल से जा रिया था ,
उधर भेल पूरी खा रिया था
संग तफरी रिया था ,
रीगल से जा रिया था , भेल पूरी खा रिया था , तफरी लगा रिया था
तेरी स्कूटी गिरी तो मैं क्या करूँ

चम्पी :- नाम क्या है ?
चम्पू :- चम्पू गुमटी
चम्पी :- घर का पता दो .
चम्पू:- लोहार पट्टी
चम्पी :- क्या करते हो ?
चम्पू :- काम से कलटी.
चम्पी :- इसका नतीजा ?
चम्पू :- कोई नहीं पटती ;(

चम्पी :- ऐ मेरे , इन्दोरी लोफर , कुछ तो काम कर ले यार ,
माल नहीं तो कम से कम एक ले ले चाल ही !!

चम्पू :- कैसे बताएं , क्यों काम ना करें , आता नहीं कुछ भी यार ,
स्कूल मैं फ़ैल था , कॉलेज तो हेल था , नौकरी की तो मत पूछो यार ,
तू जाने ना ...तू जाने ना ...............

चम्पी :- तुमसा कोई उल्लू कोई बुद्धू कोई बेवकूफ नहीं है ,
बिन पैसे के बोईंग मैं उड़ना मुमकिन ही नहीं है .....

चम्पू :- क्यूँ पैसा पैसा करती है , तू पैसों पे क्यूँ मरती है ,
बिन पैसे के मेरे लव की इज्ज़त क्यों नहीं करती है ,
एक दिन पलासिया की हर प्रोपर्टी होगी मेरी ,
पर उस दिन चम्पी की जगह कटरीना होगी मेरी

चम्पी :- ना मांगू सोना चांदी , ना मांगू हीरे मोती ,
बस तेरा प्यार ही मांगू , तू पहने चाहे जींस या पहने धोती ,

चापू :- इतने इमोशनल अत्याचार के बाद आई है तू लाइन पे ,
चल मेरी चम्पी , तेरे को तेरे इन्दोरी भिया की तरफ से हैप्पी वेलेंटाइन डे !!! -
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Sunday, January 24, 2010

Film Review of Veer


Film Review of Veer



Acting :- A road less travelled for Salman , however here he is allowed to do what he does best i.e. anger n passion transformed into fighting sequence , a bit over the top but that’s Salman for you . Jareen did a good job for her debut , looked comfortable while sharing screen space with the likes of Sallu . Suprzingly our “oye’ dancing sensation of history Mithun takes care of whatever little acting in the movie . Rest are not even coming in the mind to mention.

Direction :- As the captain of the ship Anil Sharma failed to create the mass sensation like Gadar ( although I still wonder what that movie had ) , the movie is a desperate victim of Tornado that swirls while choosing between love and country.

Memorable Scene :- The scene where a character lift the entire horse on his back.

Memorable Dialogue :- By Salman " Jahan haath maarun 5 ser gosht nikal lun " , and he literally does that in a scene and ask to weigh it :)))

Baat jo hajam nahi hui :- A girl willing to go with a guy who just killed her brother
and about to kill her father.

Music :- "Mil jaa kahin samay se pare " & rajasthani folk makes up for good music the beautiful backdrop of 19th century London stays with you along the songs.

Reason to watch :- Must watch for die hards Salman's fan , others can wait for more sensible stuff.

Reason not to watch :- IF you are really expecting a mini Troy like war epic even then you will be disappointed by a mile , ye bollywood hai jaani :)

Verdict :- An average film , on a scale of 5 it gets 2 star , just for the larger than life sceneries and Salman's Passion , hope we really travel extra mile for story
if we really wanna get any close to hollywood. Only if Salman fans "Want" can make this movie a hit , only time will tell .

2 good movies are in queue "Ishqiya" and "Rann" next week , hope to get the fun weekends back with them , till then Ciaooooooo - Amit Nandwal